कुंडली में दीर्घायु योग (Kundli Mein Dirghayu Yog)

          जातक की ६१ साल से १२० साल की आयु को दीर्घायु कहा जाता है। इस संसार में सभी जातक अपनी आयु जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। यदि कोई रोग हमें परेशान कर रहा हो तो ज्योतिषी के पास जाकर उसका संधान ढूंढते हैं और आयु की जानकारी भी लेते हैं। आमतोर पर कुंडली विशेषज्ञ ३ और ८वें स्थान की गणना करके जातक को आयु के बारे में जानकारी देते हैं। परन्तु केवल इन दो स्थानों का अध्यन करने से हम आयु की सटीक जानकरी नहीं निकल सकते। एक ज्योतिष विशेषज्ञ लग्न कुंडली, नवांश कुंडली, ग्रहों का बलाबल एवं शुभाशुभ प्रभाव, दीर्घाआयु योग अदि का अध्यन कर ही आयु की गणना करते हैं। इसके अतिक्त कुंडली में यह भी देखना आवश्यक होता है कि जातक को कोई भयंकर या लाइलाज रोग का योग तो नहीं बन रहा। आइए जानते हैं ज्योतिष के कुछ ऐसे योग जो दीर्घा आयु प्रदान करते हैं। 

  • यदि जन्म लग्नेश सूर्य का मित्र हो तो व्यक्ति को पूर्ण आयु प्राप्त होती है।
  • यदि दसवे स्थान में मंगल, नवम में गुरु और पंचम में चन्द्र हो तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि लग्नेश और अष्टमेश दोनों चर राशि में हो तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि लग्नेश केंद्र में गुरु, शुक्र के साथ हो या इनकी दृष्टि हो तो जातक पूर्ण आयु का भोग करता है।
  • यदि लग्नेश पूर्ण बली हो तथा कोई भी तीन ग्रह उच्च, स्वग्रही या मित्र राशिस्थ होकर आठवें भाव में हो तो जातक की पूर्ण आयु होती है।
  • यदि लग्नेश तथा अष्टमेश में से एक स्थिर तथा दूसरा द्विस्वभाव हो तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि राहू ३, ६ या ११वें स्थान में हो और पाप प्रभाव से रहित हो तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि शुभ ग्रह तथा लग्नेश केंद्र में हो तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि लग्न, दशम और अष्टम स्थान के स्वामी शनि के साथ केंद्र में हो तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि अष्टम में शुभ ग्रह (गुरु नहीं) हो या स्वगृही शनि हो तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि सारे ग्रह विषम राशियों, स्वराशि में या मित्र ग्रहों की राशि में हों तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि सभी ग्रह बलवान हो, लग्नेश प्रबल स्थिति में हो तो व्यक्ति को पूर्ण आयु प्राप्त होती है।
  • यदि चन्द्रमा और लग्न पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि चन्द्रमा स्वराशि का भाग्य स्थान में हो और लग्नेश मजबूत हो तो जातक दीर्घायु होता है।
  • यदि कर्क, धनु या मीन राशि का गुरु केंद्र में हो, शुभ ग्रह बली होकर केंद्र में हो और शुभता लिए सूर्य ११वें भाव में हो।
  • यदि शुभ ग्रह बुध, बृहस्पति, शुक्र, चंद्र केंद्र और त्रिकोण में हो और सब पाप ग्रह ३, ६, तथा ११वें भाव में हों तथा अष्टम भाव में शुभ ग्रह या शुभ राशि हो तो व्यक्ति के जीवन में दिव्य आयु का योग बनता है। ऐसा जातक यज्ञ, जप, अनुष्ठान व कायाकल्प क्रियाओं द्वारा हजारों वर्षों तक जीवित रह सकता है।
  • यदि गुरु अपने चतुर्वर्ग में होकर केंद्र में हो, शुक्र अपने षड्वर्ग में हो एवं कर्क लग्न हो तो ऐसा जातक मानव न होकर देवता होता है। इसकी आयु की कोई सीमा नहीं होती और वह इच्छा मृत्यु का कवच पाने में सक्षम होता है।

 

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ज्योतिष आचार्या
ममता वशिष्ट
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
कालका ज्योतिष अनुसन्धान संसथान

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